सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक अधिकारी/कर्मचारी संस्था (सपाक्स)

परिचय

वर्ष 2002 में राज्य शासन द्वारा ‘‘मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम 2002 ’’ लागू किये गये थे। इन पदोन्नति नियमों के फलस्वरूप शासकीय सेवा में विभिन्न स्तरों पर असमानता निरंतर बढती गई तथा अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी प्रावधानित आरक्षण नियमांे की असंगत व्याख्याओं के फलस्वरूप तीव्रता से वरिष्ठ पदों पर काबिज होते रहे तथा सामान्य पिछड़ा एवं अल्प संख्यक समुदायों के अधिकारी/कर्मचारी सेवा में वरिष्ठ होते हुये भी अपनी प्रतिभा के अनुकूल पदों से न सिर्फ वंचित किये गये बल्कि प्रदेश में प्रताडना का एक नया दौर शुरू हो गया।

इन नियमों की विसंगतियों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित कराये जाने के बावजूद किसी भी प्रकार की कार्यवाही न होने पर माननीय उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से अथवा समूह में विभिन्न याचिकाएं अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा लगाई गई। लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि प्रदेश में अधिकारियों/कर्मचारियों के कई संगठन होने के बावजूद इन असंवैधानिक नियमों के विरूद्ध संघर्ष में कोई भी आवाज नहीं उठा रहा था। फलस्वरूप विभिन्न विभागों के याचिकाकर्ता जो माननीय उच्च न्यायालय में न्याय की लड़ाई लड़ रहें थे, द्वारा यह प्रयास किया गया कि संगठित रूप से इस लड़ाई को लड़े जाने पर ही न्याय मिल पाना संभव है।

इस विचार के अंतर्गत ही ‘‘सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक अधिकारी/कर्मचारी संस्था (सपाक्स)’’ का जन्म हुआ। फरवरी 2016 में फर्म एवं सोसायटी से संस्था को पंजीकरण प्राप्त हुआ।

सपाक्स के उद्देश्य

  • सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों के कार्मिक कार्य में गुणात्मक सुधार लाने हेतु कार्य करना एवं इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु ऐसे कार्मिकों को संगठित कर संस्था का सदस्य बनाना।
  • सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों का हितरक्षण करना।
  • सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों की सेवा/कार्य/प्रशासन से संबंधित कठिनाईयों एवं समस्याओं के समाधान हेतु प्रयासरत रहना।
  • सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों की नियोजन संबंधी विभागीय एवं सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक रहना एवं उनके समाधान के प्रयास करना।
  • सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों को उनके कर्तव्य एवं अधिकारों के प्रति जारूक बनाना एवं इस हेतु संवैधानिक उपचार उपलब्ध करवाने की व्यवस्था हेतु प्रयास करना।
  • समान उद्देश्य वाले एवं इस संस्था के उद्देश्यों से सहमत अन्य संस्थाओं सेे सहयोग का आदान-प्रदान एवं जहां आवश्यक हो संस्था की संबंद्धता प्रदान करना।